lutf badhta hai safar ka dost kam raftaar se | लुत्फ़ बढ़ता है सफ़र का दोस्त कम रफ़्तार से

  - Ashu Mishra

लुत्फ़ बढ़ता है सफ़र का दोस्त कम रफ़्तार से
मैं भी ख़ुश होता हूँ तेरे आरज़ी इनकार से

आँख लगने की ज़रा सी देर थी बस और फिर
कट गया दरिया-ए-शब भी ख़्वाब के पतवार से

मेरी क़ुर्बत में मिरा घर भी फ़सुर्दा हो गया
अश्क गिरने लग गए हैं दीदा-ए-दीवार से

एक मैसेज नफ़रतों पर बार गुज़रा है मिरी
फूल भेजा है किसी लड़की ने सरहद पार से

उस की आँखें आप की आँखों से अच्छी थीं ज़रा
बाक़ी सारे आप बेहतर हो पुराने यार से

  - Ashu Mishra

Aurat Shayari

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