bichhad jaane pe koi bhi kisi se mar nahin jaata | बिछड़ जाने पे कोई भी किसी से मर नहीं जाता

  - Avtar Singh Jasser

बिछड़ जाने पे कोई भी किसी से मर नहीं जाता
मेरे दिल से बिछड़ जाने का फिर भी डर नहीं जाता

वो आता है तो सब से पहले मिलता है मुझे लेकिन
वो जाते वक़्त क्यूँ मुझ से कभी मिलकर नहीं जाता

ये यादें जाने वालों की तभी तक दर्द देती हैं
कि जब तक दर्द को ही वक़्त मरहम कर नहीं जाता

हर इक शय मिल गई मुझको दो-आलम की तेरे दर से
कभी भी हाथ फैलाने मैं अब घर-घर नहीं जाता

हमें बिछड़े हुए तो हो गए बरसों मगर "जस्सर"
जुदाई का इन आँखों से वही मंज़र नहीं जाता

  - Avtar Singh Jasser

Nazara Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Avtar Singh Jasser

As you were reading Shayari by Avtar Singh Jasser

Similar Writers

our suggestion based on Avtar Singh Jasser

Similar Moods

As you were reading Nazara Shayari Shayari