yuñ tumhaare husn ki maine vazaahat ki | यूँँ तुम्हारे हुस्न की मैने वज़ाहत की

  - Avtar Singh Jasser

यूँँ तुम्हारे हुस्न की मैने वज़ाहत की
सब जहाँ को छोड़ के तुम से मुहब्बत की

मिल ही जाएँगी मुझे भी घड़ियाँ राहत की
इक नज़र हो जाएगी जब तेरी रहमत की

तू तो उस शिद्दत से नफ़रत भी न कर पाई
मैने जिस दरजा सनम तुझ सेे मुहब्बत की

ढंग का इंसान तक यारों नहीं है वो
मान के मैने ख़ुदा जिसकी इबादत की

छोड़ना मुमकिन तो है लेकिन नहीं आसाँ
बात यह चाहत की कम है ज़्यादा आदत की

है मोहब्बत में ही मुमकिन मो'जिज़ा यह तो
जिसके दिल में मैं था उसने दिल से हिजरत की

सब के सब वाइज़ हुए तबदील रिंदों में
तुम ने जिस भी शहर में जस्सर सुकूनत की

  - Avtar Singh Jasser

Aadat Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Avtar Singh Jasser

As you were reading Shayari by Avtar Singh Jasser

Similar Writers

our suggestion based on Avtar Singh Jasser

Similar Moods

As you were reading Aadat Shayari Shayari