falak se chaand sitaaron se jaam lena hai | फ़लक से चाँद सितारों से जाम लेना है

  - Bashir Badr

फ़लक से चाँद सितारों से जाम लेना है
मुझे सहरस नई एक शाम लेना है

किसे ख़बर कि फ़रिश्ते ग़ज़ल समझते हैं
ख़ुदा के सामने काफ़िर का नाम लेना है

मुआ'मला है तिरा बदतरीन दुश्मन से
मिरे अज़ीज़ मोहब्बत से काम लेना है

महकती ज़ुल्फ़ों से ख़ुशबू चमकती आँख से धूप
शबों से जाम-ए-सहर का सलाम लेना है

तुम्हारी चाल की आहिस्तगी के लहजे में
सुख़न से दिल को मसलने का काम लेना है

नहीं मैं 'मीर' के दर पर कभी नहीं जाता
मुझे ख़ुदास ग़ज़ल का कलाम लेना है

बड़े सलीक़े से नोटों में उस को तुल्वा कर
अमीर-ए-शहरस अब इंतिक़ाम लेना है

  - Bashir Badr

Gulshan Shayari

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