Meaning of

तंज

tanj • طنز

व्यंग्य; ताना

sarcasm; irony

طنز; استہزاء

Arabic

कटती नहीं है बे-कली मेरी शफ़ीक़
जब तक कि ख़ुद पर तंज़ कस लेता नहीं

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तन्हाई ये तंज करे है तन्हा क्यूँ है
यार कहाँ है आगे पीछे चलने वाले

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तुम इस ख़मोश तबीअत पे तंज़ मत करना
वो सोचता है बहुत और बोलता कम है

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ज़िंदगी पर इस से बढ़ कर तंज़ क्या होगा 'फ़राज़'
उस का ये कहना कि तू शाएर है दीवाना नहीं

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तल्ख़ फब्तियाँ तीखी बातें उस पर तंज़ भरे अश'आर
उन के लब हरकत में आए शहद घुल गया कानों में

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दुनिया के पास है कोई इस तंज़ का जवाब
दीवाना अपने हाल पे ख़ुद मुस्कुरा लिया

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तंज़ करना फिर उसी से प्यार करना
जाँ कहा से सीखा है ये वार करना

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मरज़ अजीब था अपना अजब मसीहा थे
दवा ने मुझ पे दवा पर शिफ़ा ने तंज़ किया

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तन्ज़िया फ़िक्र का मैं ने भी दिया उस को जवाब
वो है नादान समझता है कि बच्चा हूँ मैं

उस ने हँसते हुए पूछा था कि कैसे हो तुम
मैं ने भी हँसते हुए कह दिया अच्छा हूँ मैं

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तंज़ जो मुझ पे कर रहा है तू अभी
दाद देगा ज़रूर शे'र पे मिरे

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कटती नहीं है बे-कली मेरी शफ़ीक़
जब तक कि ख़ुद पर तंज़ कस लेता नहीं

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तन्हाई ये तंज करे है तन्हा क्यूँ है
यार कहाँ है आगे पीछे चलने वाले

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'तंज' चतुराई की तीक्ष्णता और विडंबना की सूक्ष्मता को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर दिखावे और वास्तविकता के बीच के अंतर को उजागर करता है, गहरे सत्य को प्रकट करने के लिए शब्दों का चतुर खेल।

कवि 'तंज' का उपयोग सामाजिक मानदंडों की आलोचना करने, पाखंड को उजागर करने, और अपनी कविताओं में जटिलता की एक परत जोड़ने के लिए करते हैं।

'तंज' विडंबना का कलात्मक नृत्य है, समाज के छिपे हुए सत्यों को प्रतिबिंबित करने वाला एक दर्पण।