हर दिल में आग शहर है सहरा है आग में
इतनी बढ़ी है आग कि दरिया है आग में
ये किसने आग के है मुआनी बदल दिए
ये किसने आज फूल खिलाया है आग में
हँसते हैं देख-देख के जलते हुए मकान
कैसे हैं लोग जिनका तमाशा है आग में
बस सिर्फ़ मेरे घर पे नहीं आग के सितम
इक हश्र सा बपा है कि दुनिया है आग में
आँखों में उसकी रक़्साँ हैं शोले शबाब के
क्या लुत्फ़ है कि नर्गिस-ए-शहला है आग में
मुझको जला के ख़ुद भी वो बेचैन है 'सबा'
तड़पा है उसने मुझको जो देखा है आग में
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