
ये जो तुम कर रही हो मुझ सेे बेरूख़ी-सी बातें
बड़ा दुख होगा तुम्हें तोड़ कर हम से हसीं नातें
फिर न कहना के बदल गया हूँ मैं मोहब्बत में
मैं कब तक सहूँगा आख़िर तेरी तल्ख़-सी बातें
— Faizan Faizi
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