ये दिल मलूल भी कम है उदास भी कम हैकई दिनों से कोई आस पास भी कम हैहमें भी यूँ ही गुजरना पसंद है और फिरतुम्हारा शहर मुसाफ़िर-शनास भी कम है— Farhat Abbas Shah