bheegi bheegi barkha rut ke manzar geelay yaad karo | भीगी भीगी बरखा रुत के मंज़र गीले याद करो

  - Ghaus Siwani

भीगी भीगी बरखा रुत के मंज़र गीले याद करो
दो होंट रसीले याद करो दो नैन कटीले याद करो

तुम साथ हमारे चलते थे सहरा भी सुहाना लगता था
गुल-पोश दिखाई देते थे सब रेत के टीले याद करो

घुँगरू की सदाएँ आती थीं संतूर कभी बज उठते थे
माहौल में गूँजा करते थे संगीत रसीले याद करो

हम भी थे कुछ बे-ख़ुद से तुम भी थे मदहोश बहुत
और एहसास की चोली के कुछ बंद थे ढीले याद करो

वो प्यार भरी इक मंज़िल थी ता-हद्द-ए-नज़र थे फूल खिले
तन-मन में ज्वाला भरते थे मंज़र रंगीले याद करो

  - Ghaus Siwani

Baarish Shayari

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