ab ye aalam hai mirii bechaargi ka | अब ये आलम है मिरी बेचारगी का

  - Harsh saxena

अब ये आलम है मिरी बेचारगी का
क़ाफ़िया भूला हुआ हूँ शा'इरी का

हम सेफ़र वो मेरा बन सकता नहीं गर
क्यूँ बढ़ाऊँ हाथ फिर मैं दोस्ती का

अब किसे फ़ुर्सत मोहब्बत की यहाँ पर
ढूँढते हैं मौक़ा सब हम-बिस्तरी का

उस निगाह-ए-नाज़ की जादूगरी है
जो असर होता नहीं कुछ मय-कशी का

इक नज़र उस चेहरे की देखी है जब से
यार मुँह उतरा हुआ है रौशनी का

आए-दिन बिन सोचे समझे लिखने वालों
दर्द समझोगे नहीं तुम लेखनी का

हम सुख़न-वर हैं हमें बस दाद दीजे
है यही वेतन हमारी नौकरी का

  - Harsh saxena

Love Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Harsh saxena

As you were reading Shayari by Harsh saxena

Similar Writers

our suggestion based on Harsh saxena

Similar Moods

As you were reading Love Shayari Shayari