ishq mujh par jab se haavi ho gaya hai | इश्क़ मुझ पर जब से हावी हो गया है

  - Harsh saxena

इश्क़ मुझ पर जब से हावी हो गया है
रंग गालों का गुलाबी हो गया है

जी नहीं भरता तेरे दीदार से अब
दिल तेरी बाँहों का आदी हो गया है

उस बदन के मोड़ से इतने हैं गुज़रे
याद रस्ता मुँह-ज़बानी हो गया है

छिप गई है बे-वफ़ाई इस दफ़ा भी
बात सुनने को वो राज़ी हो गया है

पड़ गया महँगा तेरी फोटो हटाना
पर्स का हर नोट जाली हो गया है

चल रहे हैं रोज़ ख़ंजर इसके अंदर
दिल हमारा राजधानी हो गया है

ख़्वाहिशों का क़त्ल करना लाज़मी है
अब ये पेशा ख़ानदानी हो गया है

  - Harsh saxena

Promise Shayari

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