
वो जिस की याद ने जीना मुहाल कर रखा है
उसी की आस ने मुझ को सँभाल कर रखा है
सियाह रातों में साए से बातें करता है
तुम्हारे ग़म ने नया रोग पाल कर रखा है
— Harsh saxena
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