din hamaare sanwar ga.e hote | दिन हमारे सँवर गए होते

  - Inshaad Khadialvi

दिन हमारे सँवर गए होते
हद से गर हम गुज़र गए होते

जीने में कुछ मज़ा नहीं है अब
इस से अच्छा तो मर गए होते

आज पछता रहे न होते हम
काश कल जो सुधर गए होते

पास तस्वीर जो न होती तिरी
हिज्र में कब के मर गए होते

शा'इरी गर सँभालती न तो हम
ग़म के मारे किधर गए होते

  - Inshaad Khadialvi

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