पुरानी कहानी सुनाओ तो कोई
दिलों में मोहब्बत जगाओ तो कोई
ख़ुशी में तो सब मेरे साथी थे लेकिन
अभी ग़म-ज़दा हूँ मैं, आओ तो कोई
है मुश्किल मनाना मुझे यार लेकिन
मैं भी मुंतज़िर हूँ, मनाओ तो कोई
नहीं है ज़रूरत मुझे अब किसी की
हाँ जाकर उसे ये बताओ तो कोई
ये ख़ल्वत ही लेगी मेरी जान इक दिन
अँधेरे में शम्मा जलाओ तो कोई
मैं अब मर चुका हूँ, मुबारक हो सबको
जनाज़ा मेरा अब उठाओ तो कोई
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