फ़ासला जब दरमियाँ में अपने अपने रह गया
हाएे फिर मेरा मुक़द्दर बनते बनते रह गया
डूबने लगता है सूरज की तरह हर आदमी
ख़ुद नुमाई का ये जज़्बा जैसे तैसे रह गया
उम्र भर मुझको परीशाँ अब करेगा ये सवाल
कुछ तो था जो उसके लब पर आते आते रह गया
उस सेे मिलना था यक़ीनन बन्दिशों को तोड़कर
ऐन मुमकिन था ये होना होते होते रह गया
वक़्त की रफ़्तार ने बदली है करवट इस तरह
आगे आगे जो चला था पीछे पीछे रह गया
मिलती जुलती ही कहानी थी मेरी उस शख़्स से
वो मुझे और मैं उसे फिर सुनते सुनते रह गया
मिल गई मन्ज़िल किसी को अपनी काशिफ़ देखिये
और कोई मन्ज़िल की जानिब बढ़ते बढ़ते रह गया
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