या'नी कि इश्क़ अपना मुकम्मल नहीं हुआगर मैं तुम्हारे हिज्र में पागल नहीं हुआवो शख़्स सालों बा'द भी कितना हसीन हैवो रंग कैनवस पे कभी डल नहीं हुआ— Kushal Dauneria