ख़ूब उन को सभी की दुआएँ मिली
बेगुनाहों को फिर क्यूँँ सज़ाएँ मिली
इश्क़ के पैंतरे फूल से सीखना
गुल महकते ही फिर से सदाएँ मिली
एक उम्मीद में कट गई ज़िंदगी
और हालात से भी जफ़ाएँ मिली
बेवफ़ाई से ही पहले अंजाम क्यूँँ
इस क़दर फ़ैसले से सज़ाएँ मिली
मुंतशिर ही हुआ मैं तेरे ही सिवा
इस तरह हिज्र की बद्दुआएंँ मिली
उन दरख़्तों से क्या माॅंगता ही कोई
छाँव के बाद भी तो क़बाएँ मिली
ज़िंदगी के सफ़र में बहुत कुछ मिला
यार ग़ैरों से भी तो वफ़ाएँ मिली
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