वीरान यारों घर हुआ है अब वहाँ
ख़ुशहाल था जर्जर हुआ है अब वहाँ
उजड़ा हुआ तन्हा लगे वो आशियाँ
था जो बड़ा दर-दर हुआ है अब वहाँ
शाख़ों पे जिनका था बसेरा ही कभी
वो घोंसला जर्जर हुआ है अब वहाँ
खेले सभी थे दोस्त बचपन में जहाँ
मैदान वो बंजर हुआ है अब वहाँ
झरना वहाँ बहता कभी था जो वो भी
छोटा कोई सरवर हुआ है अब वहाँ
रिश्ता मेरा गहरा फला-फूला वहाँ
इक दोस्त जो रहबर हुआ है अब वहाँ
सब वक़्त के हाथों "मनोहर" खो गया
वीरान ही मंज़र हुआ है अब वहाँ
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