be-khayaali men yoon hi bas ik iraada kar liya | बे-ख़याली में यूँँ ही बस इक इरादा कर लिया

  - Muneer Niyazi

बे-ख़याली में यूँँ ही बस इक इरादा कर लिया
अपने दिल के शौक़ को हद से ज़ियादा कर लिया

जानते थे दोनों हम उस को निभा सकते नहीं
उस ने वा'दा कर लिया मैंने भी वा'दा कर लिया

ग़ैर से नफ़रत जो पा ली ख़र्च ख़ुद पर हो गई
जितने हम थे हम ने ख़ुद को उस से आधा कर लिया

शाम के रंगों में रख कर साफ़ पानी का गिलास
आब-ए-सादा को हरीफ़-ए-रंग-ए-बादा कर लिया

हिजरतों का ख़ौफ़ था या पुर-कशिश कोहना मक़ाम
क्या था जिस को हम ने ख़ुद दीवार-ए-जादा कर लिया

एक ऐसा शख़्स बनता जा रहा हूँ मैं 'मुनीर'
जिस ने ख़ुद पर बंद हुस्न ओ जाम-ओ-बादा कर लिया

  - Muneer Niyazi

Kamar Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Muneer Niyazi

As you were reading Shayari by Muneer Niyazi

Similar Writers

our suggestion based on Muneer Niyazi

Similar Moods

As you were reading Kamar Shayari Shayari