
परछाइयों से मेरी तो अब हो रही अन बन
सूना है उस के जाने से घर और ये आँगन
मैं ने चखा था जिस्म जो वो अब किसी का है
जूठा उठा के खा रहे मेरे सभी दुश्मन
— Murari Mandal
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