maare vehshat ke ye tasveer banaa baithe hain | मारे वहशत के ये तस्वीर बना बैठे हैं

  - Neeraj Neer

मारे वहशत के ये तस्वीर बना बैठे हैं
अपने ही पाँव में ज़ंजीर बना बैठे हैं

दिल बनाने को कहा था कभी उसने लेकिन
हम भी नादान फ़क़त तीर बना बैठे हैं

अब मिरा प्रश्न है दुख कौन बनाता है?
लाज़मी है वो जो *शमशीर बना बैठे हैं!
*शमशीर- तलवार

आप के जैसे बनाते हैं नमी आँखों में
मेरे जैसे सभी *नम-गीर बना बैठे हैं
*नमी सोखने वाला

उन सेे पूछे कोई ग़म अस्ल में होता क्या है
दिल की दुनिया को जो कश्मीर बना बैठे हैं

  - Neeraj Neer

Kashmir Shayari

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