इन दीवारों की भी आँखें आ जाती हैंमेरे पहलू से जब यादें आ जाती हैंसँभलने लगता हूँ जब भी मैं यारों तबदिन को धमका के ये रातें आ जाती हैं— NISHKARSH AGGARWAL