कर दिया जब तू ने ऐलान-ए-जुदाई
छोड़ दी फिर मैंने भी तेरी कलाई
जश्न मैंने ग़म का कुछ ऐसे मनाया
ख़ुद भी पी और दोस्तों को भी पिलाई
ख़ुद-कुशी इस मसअले का हल नहीं है
लड़कियाँ तो धोका ही देती हैं भाई
मैं जो बोला आज अच्छी लग रही हो
तो वो बोली मुझको करनी है पढ़ाई
मुंतज़िर जिसका रहा मैं ज़िंदगी भर
वो गई तो फिर कभी वापिस न आई
नौजवाँ जब रोज़ इस
में मर रहे हैं
ऐ ख़ुदा तू ने मुहब्बत क्यूँ बनाई
जब मेरी माँ ने मेरा ये फ़ोन खोला
वालपेपर पे तेरी तस्वीर आई
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