
मोहब्बत यार कैसी कश्मकश में फँस गई जिस
में
छुपाना भी ज़रूरी है जताना भी ज़रूरी है
अँधेरे में चलेंगे तो गिरेंगे लोग लड़-भिड़ कर
कहाँ क्या चीज़ है घर में बताना भी ज़रूरी है
— Atul K Rai
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