ye bachpan ke din | ये बचपन के दिन

  - Rais Farog

ये बचपन के दिन
ये बचपन के दिन
गुलों की तरह मुस्कुराने के दिन हैं
दियों की तरह मुस्कुराने के दिन हैं

ये बचपन के दिन
ये बचपन के दिन
डिबेटों में इनआम पाना है हम को
कुइज़ में भी कप जीत लाना है हम को
पढ़ाई में भी फ़र्स्ट आने के दिन हैं

हुनर सीखते हैं अदब सीखते हैं
ज़ेहानत बढ़ाने के ढब सीखते हैं
यही ज़िंदगी को बनाने के दिन हैं
बहुत हैं हमें इल्म ही के ख़ज़ाने
जो दुनिया की बातें वो दुनिया ही जाने
हमारे तो पढ़ने-पढ़ाने के दिन हैं

  - Rais Farog

Ilm Shayari

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