
बहुत आगे निकल आया हूँ मैं अब इस सफ़र में
यहाँ से लौटने की कोई गुंजाइश नहीं है
ये कैसा खेल है इन बादलों का शहर में दोस्त
कहीं सूखा नहीं है तो कहीं बारिश नहीं है
— Raj Tiwari
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