एक दिवाने की यादों में एक दिवानी रक़्स करेगी

सन्नाटे की तिर-किट-धिन पर रोज़ उदासी रक़्स करेगी

यार कहानी लिखने वाले, जल्दी मिलवा हम दोनों को
हम दोनों के मिलने पर ही तेरी कहानी रक़्स करेगी

मेरी ग़ज़लें तुम गाओ तो ख़ुशबू ख़ुशबू हो जाएगी
जैसे चम्पा के फूलों पर नन्ही तितली रक़्स करेगी

तानाशाह ने क्या सोचा था, शहज़ादी को बाँध सकेगा
प्यादे की धुन पर गाएगी, इश्क़ करेगी, रक़्स करेगी

इक मुद्दत से गुम सुम थी जो, पिया मिलन पर चहक उठी है
ढ़ोल नगाड़े बजवाओ अब, पागल लड़की रक़्स करेगी

हम दोनों के मिल जाने से झूम उठेगा सारा मथुरा
मोहन के काँधे पर सर रख राधा रानी रक़्स करेगी

— RAVI GOSWAMI

Gulshan Shayari

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