बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहींहम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहींतुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हूतुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं— Rehman Faris