कुछ काम धाम है ही नहीं और क्या करें
दिन रात सुब्हो-शाम चलो मशवरा करें
सब लोग कह रहे हैं हमें इश्क़ हो गया
तो क्यूँँ न छत पे रात में तारे गिना करें
सारी सिफ़त तमाम मोहब्बत उसी की है
हर छोटी छोटी बात का अब क्या गिला करें
हम को बराबरी न मिली इश्क़ में कभी
ये क्या कि रोज़ रात में हम ही जगा करें
है सच कि आसमान से सब देखता है वो
अच्छा करें बुरा करें कुछ भी किया करें
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