मेरे ख़्वाब मेरी ख़ुशी का हुआ क्यालबों की मेरी इन हँसी का हुआ क्याबड़ी ख़ूब-सूरत थी ये ज़िंदगी तोपता ना चला ज़िंदगी का हुआ क्या— Sandeep Gandhi Nehal