जितना गहरा अपना बंधन होता है
उतना ये जग अपना दुश्मन होता है
जिसका पैसा काम न आए लोगों के
वो धन वाला सब सेे निर्धन होता है
वो संघर्ष की चलती फिरती गाथा हो
इतना मुश्किल माँ का जीवन होता है
झूठ नहीं कहता टूटा होने पर भी
जग में सब सेे सच्चा दर्पन होता है
ढूँढे पर भी राम नहीं मिलता है अब
हर इंसाँ में लेकिन रावन होता है
पहले नाव बनाकर तैराते थे हम
अब तो सूखा सूखा सावन होता है
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