ऐसा नहीं कि मैंने मोहब्बत नहीं करी
इज़हार करने ही कि बस हिम्मत नहीं करी
ये भी सितम ग़ज़ल का कोई कम तो नहीं है
इसने हमारी 'जौन' सी हालत नहीं करी
ऐसा भी कोई है कि जिसने 'जौन' पढ़ा हो
और उस के जैसे ग़म की हसरत नहीं करी
शैतान बनाती तो है इब्लिस को ये इक बात
उसने ख़ुदा की हुक्म की इज़्ज़त नहीं करी
'इमरान' जाने कितनों के चक्कर में पड़ा है
इसने किसी इक हुस्न कि चाहत नहीं करी
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