aisa nahin ki maine mohabbat nahin kari | ऐसा नहीं कि मैंने मोहब्बत नहीं करी

  - Shaad Imran

ऐसा नहीं कि मैंने मोहब्बत नहीं करी
इज़हार करने ही कि बस हिम्मत नहीं करी

ये भी सितम ग़ज़ल का कोई कम तो नहीं है
इसने हमारी 'जौन' सी हालत नहीं करी

ऐसा भी कोई है कि जिसने 'जौन' पढ़ा हो
और उस के जैसे ग़म की हसरत नहीं करी

शैतान बनाती तो है इब्लिस को ये इक बात
उसने ख़ुदा की हुक्म की इज़्ज़त नहीं करी

'इमरान' जाने कितनों के चक्कर में पड़ा है
इसने किसी इक हुस्न कि चाहत नहीं करी

  - Shaad Imran

Ghayal Shayari

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