रक्खा ज़रूरतों के सबब बे-दिली से याद
करता है कौन हमको भला अब ख़ुशी से याद
इक बे-कली ने याद से ग़ाफ़िल किया तेरी
कुछ कल पड़ी तो करने लगे बे-कली से याद
करते हैं कुछ भी याद तो आता है याद वो
मंसूब हो गई है हमारी किसी से याद
दरिया-दिली पे मेरी वो हैरान रह गया
उसने रखा था मुझको मेरी तिश्नगी से याद
मुझको यक़ीन है मेरे जाने के बाद भी
मुझको रखेंगे आप मेरी शा'इरी से याद
Read Full