मैं अपनी कैफ़ियत से अब जुदा हूँ
उसे ख़ुश देख कर ख़ुश हो रहा हूँ
इधर मंज़िल नहीं है जानता हूँ
मगर फिर भी तिरी जानिब चला हूँ
मुझे पागल कहा करता था इक शख़्स
नहीं था कल तलक अब हो गया हूँ
ज़ियादा अब नहीं करता हूँ मन की
किसी को ग़ौर से सुनने लगा हूँ
कहीं पर दिल नहीं लगता है मेरा
तिरे पहलू में इक मुद्दत रहा हूँ
मिरे पीछे था जो आसेब मैं अब
उसी आसेब के पीछे पड़ा हूँ
मिरे हिस्से का सब कुछ लुट चुका है
मैं अब बर्बाद होने जा रहा हूँ
Read Full