haan ye sach hai ki mohabbat nahin ki | हाँ ये सच है कि मोहब्बत नहीं की

  - Tehzeeb Hafi

हाँ ये सच है कि मोहब्बत नहीं की
दोस्त बस मेरी तबीयत नहीं की

इसलिए गांव मैं सैलाब आया
हमने दरियाओ की इज़्ज़त नहीं की

जिस्म तक उसने मुझे सौंप दिया
दिल ने इस पर भी कनायत नहीं की

मेरे एजाज़ में रखी गई थी
मैने जिस बज़्म में शिरकत नहीं की

याद भी याद से रखा उसको
भूल जाने में भी गफलत नहीं की

उसको देखा था अजब हालत में
फिर कभी उसकी हिफाज़त नहीं की

हम अगर फतह हुए है तो क्या इश्क़ ने किस पे हकूमत नहीं की

  - Tehzeeb Hafi

Kamar Shayari

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