tujhe na aayengi mufalis ki mushkilaat samajh | तुझे ना आएंगी मुफ़लिस की मुश्किलात समझ

  - Umair Najmi

तुझे ना आएंगी मुफ़लिस की मुश्किलात समझ
मैं छोटे लोगों के घर का बड़ा हूँ बात समझ

मेरे इलावा हैं छे लोग मुनहसीर मुझ पर
मेरी हर एक मुसीबत को ज‌र्ब सात समझ

दिल ओ दिमाग ज़रूरी हैं ज़िन्दगी के लिए
ये हाथ पाऊं इज़ाफ़ी सहूलियत समझ

फ़लक से कट के ज़मीन पर गिरी पतंगें देख
तू हिज्र काटने वालों की नफ़सियात समझ

किताब-ए-इश्क़ में हर आह एक आयत है
और आँसुओं को हुरूफ-ए-मुक़त्तेआत समझ

  - Umair Najmi

Ghar Shayari

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