tum ko vehshat to seekha dii guzaarein laayak | तुम को वेहशत तो सीखा दी गुजारें लायक

  - Umair Najmi

तुम को वेहशत तो सीखा दी गुजारें लायक
और कोई हुक्म कोई काम हमारे लायक

माजरत में तो किसी और के मसरफ में हुं
ढूंढ देता हु मगर कोई तुम्हारे लायक

एक दो ज़ख़्मों की गहराई और आँखों के खंडर
और कुछ खास नहीं मुझ में नज़ारे लायक

घोंसला छाव हरा रंग समर कुछ भी नहीं
देख मुझ जैसे शजर होते है आरे लायक

इस इलाक़े में उजालों की जगह कोई नहीं
सिर्फ़ परचम है यहाँ चाँद सितारे लायक

मुझ निक्क
में को चुना उस ने तरस खा के उमेर
देखते रह गए हसरत से बेचारे लायक

  - Umair Najmi

Eid Shayari

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