ya tiri aarzoo sa ho jaaun | या तिरी आरज़ू सा हो जाऊँ

  - Vineet Aashna

या तिरी आरज़ू सा हो जाऊँ
या तिरी आरज़ू का हो जाऊँ

मिरे कानों में जो तू कुन कह दे
मैं तसव्वुर सा तिरा हो जाऊँ

मुझ से इक बार ज़रा मिल ऐसे
मैं तिरे घर का पता हो जाऊँ

तू भी आ जाना कहीं रख के बदन
जिस्म से मैं भी जुदा हो जाऊँ

तोड़ कर माटी ये मेरी फिर से
यूँँ बनाओ कि नया हो जाऊँ
इश्क़ की रस्म यही है बाक़ी
मैं भी इक बार ख़फ़ा हो जाऊँ

आशनाई है सुख़न-गोई भी
और कितना मैं बुरा हो जाऊँ

  - Vineet Aashna

Aarzoo Shayari

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