जब तलक देता नहीं वो दाइमी नाम
रख दो तब तक मेरा कोई आरज़ी नाम
शा'इरी सोचें या तस्वीरें बनाएँ
याद आते हैं कभी चेहरे कभी नाम
नाम से मुझ को बुलाना कब है उस ने
इसलिए मत रखना मेरा कोई भी नाम
भूल बैठा एक दिन वो नाम मेरा
और उसी दिन से नहीं मेरा कोई नाम
जो कभी सोचे थे मेरे साथ मिल कर
उस ने रक्खे अपने बच्चों के वही नाम
कोई पागल कहता है तो कोई शाइर
जानता कोई नहीं मेरा सही नाम
कौन था वो जिस से ये ग़लती हुई थी
किस ने शैतानों का रक्खा आदमी नाम
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