उम्र यूँ ही तमाम होगी क्या
मौत के बा'द ही मिलोगी क्या
मौत के बा'द ही मिलोगी क्या
तुम मेरा ख़्वाब ही रही अब तक
तुम मेरा ख़्वाब ही रहोगी क्या
आ गई हो तो चैन से बैठो
ज़ेहन में घूमती फिरोगी क्या
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जो भी अच्छा भला आदमी है ख़ुदा
बस उसी से तेरी दुश्मनी है ख़ुदा
बस उसी से तेरी दुश्मनी है ख़ुदा
मानता हूँ तुझे क्या ये काफ़ी नहीं
क्या तेरी बंदगी लाज़मी है ख़ुदा
पहले जीता था मैं ज़िंदगी को मगर
ज़िंदगी अब मुझे जी रही है ख़ुदा
क्या सितम है कि मुझ को पता भी नहीं
किस ख़ता की सज़ा मिल रही है ख़ुदा
अब दुआ है वो लड़की सलामत रहे
जिस को अम्मा मेरी कोसती है ख़ुदा
चाहता हूँ उसे मुझ से बेहतर मिले
और वो भी यही चाहती है ख़ुदा
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एक औरत को देखने के लिए
इतना बैचैन आदमी क्यूँ हो
जिस से ख़तरा नहीं मुहब्बत का
ऐसी लड़की से दोस्ती क्यूँ हो
मैं जो टोकूँ तो टोकती ही नहीं
मैं न टोकूँ तो टोकती क्यूँ हो
ख़ूब नोचा है ज़िंदगी ने मुझे
इतनी आसान ख़ुद-कुशी क्यूँ हो
हम हैं मालिक उदास चेहरों के
आइना देख कर ख़ुशी क्यूँ हो
तेरी चौखट पे जब अँधेरा है
मेरे कमरे में रौशनी क्यूँ हो
कर दिए दफ़्न पैरहन उस के
जो नहीं साँप केंचुली क्यूँ हो
जब सलीक़ा न हो बजाने का
हाथ मोहन के बाँसुरी क्यूँ हो
जब कोई काम ही नहीं मुझ से
मेरे बारे में सोचती क्यूँ हो
आ गए पास जब समुंदर के
फिर किनारे से वापसी क्यूँ हो
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ख़बर मौत की क्या ख़बर है
कहीं इश्क़ हो तो बताओ
कहीं इश्क़ हो तो बताओ
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मरहमों को ये इजाज़त दी है
ज़ख़्म का हाथ बटाओ जाओ
घर कहीं और बसा लो लेकिन
दिल तुम्हारा ही है आओ जाओ
अब मिरी लाश में क्या रक्खा है
ख़ाक में ख़ाक मिलाओ जाओ
वक़्त बर्बाद हुआ जाता है
काम की बात बताओ जाओ
मुझ को बर्बाद बताने वालों
अपनी औलाद बचाओ जाओ
खिड़कियाँ याद किया करती हैं
घर तुम्हारा है तो आओ जाओ
मैं कहीं और लगा लूँगा दिल
तुम कहीं और लगाओ जाओ
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