आमद-ओ-शुद, सा'अत-ए- हिज्र-ओ-विसाल
मेरी इन आँखों ने क्या क्या देखा है
दुख किसी का कोई कैसे समझे जब
सब ने बस अपना ही अपना देखा है
यूँ नहीं होता किसी का कोई भी
ख़ुद को जैसे तेरा होता देखा है
मैं ने अपने दिल को सीने में नहीं
ग़ैर के पहलू में धड़का देखा है
रंज, धोखे सब मिले तेरे सबब
मैं ने हरदम ख़ुद को तन्हा देखा है
ज़ब्त का दावा था जिन को इश्क़ में
आज मैं ने उन को रोता देखा है
मुझ से मिलने आए हैं वो मेरे घर
फ़ैज़ मैं ने कैसा सपना देखा है
10
1 Like
9
1 Like
अपनी दुनिया बसा रहा हूँ मैं
जा तुझे अब भुला रहा हूँ मैं
जा तुझे अब भुला रहा हूँ मैं
आज की शब बड़ी क़यामत है
वाक़ई सोने जा रहा हूँ मैं
हाँ मुहब्बत कभी नहीं मिटती
ख़ुद को लेकिन मिटा रहा हूँ मैं
उस की ख़ुशियों के वास्ते लोगों
बार ए ग़म भी उठा रहा हूँ मैं
या ख़ुदा सुन ले इल्तिजा मेरी
दर तिरा खटखटा रहा हूँ मैं
ये धुआँ बे सबब नहीं उठता
अपना सीना जला रहा हूँ मैं
फ़ैज़ उर्दू अदब की दुनिया में
अपना जलवा दिखा रहा हूँ मैं
8
2 Likes
7
2 Likes
6
3 Likes
आज तेरा है लगन और मेरी बर्बादी है
ये जनम-दिन है मेरा और तेरी शादी है
ये जनम-दिन है मेरा और तेरी शादी है
5
3 Likes
यार तू मुझ को अब तलाश न कर
इश्क़ में फिर से खो गया हूँ मैं
इश्क़ में फिर से खो गया हूँ मैं
4
4 Likes
तुम्हारी याद में आँखें भिगो रहा हूँ मैं
मगर ज़माना समझता है रो रहा हूँ मैं
मगर ज़माना समझता है रो रहा हूँ मैं
कमाल ये है कि ख़ुद अपने दिल के तारों में
हसीन इश्क़ के मोती पिरो रहा हूँ मैं
कटी है उम्र ये सारी बुतों की उल्फ़त में
मगर अब अपने गुनाहों को धो रहा हूँ मैं
मेरे यक़ीन का इस से ही इम्तिहाँ होगा
भँवर में इश्क़ के कश्ती डुबो रहा हूँ मैं
मिले तो उस को निशानी वो दूँ मोहब्बत की
उठा के शाने पे अपने जो ढो रहा हूँ मैं
ख़याल आबला-पाई है हर क़दम मुझ को
सो अपनी राह में काँटे बो रहा हूँ मैं
लगा रहे हैं वो मेंहदी ख़ुशी की हाथों में
सुकून दिल का मगर फ़ैज़ खो रहा हूँ मैं
3
3 Likes
मुझ को इस मोड़ पर छोड़ जाने के बा'द
क्या मिले गा तुझे दिल दुखाने के बा'द
क्या मिले गा तुझे दिल दुखाने के बा'द
चेहरे अहबाब के फिर उतरने लगे
जब हँसे हम कभी ग़म छुपाने के बा'द
रिज़्क़ के वास्ते घर से निकला था मैं
दिल मसर्रत में है कुछ कमाने के बा'द
ज़िंदगी की हक़ीक़त समझ आ गई
बारिशों में पतंगें उड़ाने के बा'द
देख ले जा के तारीख़ ए कर्बो बला
और ऊँचा हुआ सर कटाने के बा'द
ऐसा बिखरा हुआ है तिरा फ़ैज़ अब
जैसे शीशा कोई टूट जाने के बा'द
2
1 Like
1
3 Likes









