तेरे हिस्से जो आए वो मेरी ख़ुशियों के प्याले हों
तेरे सब ज़ख़्म ग़म हरदम यहाँ मेरे हवाले हों
तेरे सब ज़ख़्म ग़म हरदम यहाँ मेरे हवाले हों
लिखा कुछ है नहीं अरसे से मैं ने अब ये लगता है
विचारों पे मेरे शाइ'र ने पन्ने भर न डाले हों
उलझती ज़िंदगी में बस मुझे इतनी रिफ़ाक़त हो
मेरे अश्कों से पढ़ ले वो जो भी आँखों में नाले हों
सभी ने हाल पूछा है मरीजों का यहाँ लेकिन
उसे पूछा नहीं है जिस ने उस के ग़म सँभाले हों
मेरी आँखें तेरे ख़्वाबों को बस इतनी सलामत दें
तेरी हस्ती को इन आँखों से हरदम बस उजाले हों
कभी लगते नहीं हैं बस्ते भारी उन को कंधों पर
लड़कपन उम्र में जिस ने ये सारे पेट पाले हों
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मुझे बेचैन रखती हैं हमेशा बस यही बातें
किसे अब कह रहा होगा वो सब मुझ से कही बातें
किसे अब कह रहा होगा वो सब मुझ से कही बातें
मैं कहती हूँ बहुत कुछ पर सभी को साफ़ दिखता है
मैं कहना चाहती हूँ बस फ़क़त तेरी वही बातें
मैं चाहूँ तो तेरे चेहरे से ये पर्दा गिरा दूँ पर
मुहब्बत से डरेगा ये जहाँ सुन कर कही बातें
तू जिस का हाथ था
में कल मिला था मुझ को राहों में
वो कितना है तेरा ये देख बतला कर सही बातें
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तेरा मग़रूर हो जाना मुझे खलता नहीं लेकिन
तेरी आँखों से मुझ को और कुछ मालूम होता है
तेरी आँखों से मुझ को और कुछ मालूम होता है
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Sakshi Saraswat
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मैं बे-मतलब सा इश्क़ निभाना चाहती हूँ
उस की बातों से नज़्म चुराना चाहती हूँ
उस की बातों से नज़्म चुराना चाहती हूँ
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