किसी ने कैसे ख़ज़ाने में रख लिया है मुझे
उठा के अगले ज़माने में रख लिया है मुझे
उठा के अगले ज़माने में रख लिया है मुझे
वो मुझ से अपने तहफ़्फ़ुज़ की भीक ले के गया
और अब उसी ने निशाने में रख लिया है मुझे
मैं खेल हार चुका हूँ तिरी शराकत में
कि तू ने मात के ख़ाने में रख लिया है मुझे
मिरे वजूद की शायद यही हक़ीक़त है
कि उस ने अपने फ़साने में रख लिया है मुझे
शजर से बिछड़ा हुआ बर्ग-ए-ख़ुश्क हूँ 'फ़ैसल'
हवा ने अपने घराने में रख लिया है मुझे
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मैं भी रुकता हूँ मगर रेग-ए-रवाँ की सूरत
मेरा ठहराव रवानी की तरह होता है
तेरे जाते ही मैं शिकनों से न भर जाऊँ कहीं
क्यूँ जुदा मुझ से जवानी की तरह होता है
जिस्म थकता नहीं चलने से कि वहशत का सफ़र
ख़्वाब में नक़्ल-ए-मकानी की तरह होता है
चाँद ढलता है तो उस का भी मुझे दुख 'फ़ैसल'
किसी गुम-गश्ता निशानी की तरह होता है
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पनाह देती है हम को नशे की बे-ख़बरी
हमारे बीच ख़बर की बला लगी हुई है
कमाल है नज़र-अंदाज़ करना दरिया को
अगरचे प्यास भी बे-इंतिहा लगी हुई है
पलक झपकते ही ख़्वाहिश ने कैनवस बदला
तलाश करने में चेहरा नया लगी हुई है
तू आफ़्ताब है जंगल को धूप से भर दे
तिरी नज़र मिरे ख़े
में पे क्या लगी हुई है
इलाज के लिए किस को बुलाइए साहब
हमारे साथ हमारी अना लगी हुई है
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फिर यूँ हुआ कि हाथ से कश्कोल गिर पड़ा
ख़ैरात ले के मुझ से चला तक नहीं गया
मस्लूब हो रहा था मगर हँस रहा था मैं
आँखों में अश्क ले के ख़ुदा तक नहीं गया
जो बर्फ़ गिर रही थी मिरे सर के आस-पास
क्या लिख रही थी मुझ से पढ़ा तक नहीं गया
'फ़ैसल' मुकालिमा था हवाओं का फूल से
वो शोर था कि मुझ से सुना तक नहीं गया
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हर शख़्स परेशान है घबराया हुआ है
महताब बड़ी देर से गहनाया हुआ है
महताब बड़ी देर से गहनाया हुआ है
है कोई सख़ी इस की तरफ़ देखने वाला
ये हाथ बड़ी देर से फैलाया हुआ है
हिस्सा है किसी और का इस कार-ए-ज़ियाँ में
सरमाया किसी और का लगवाया हुआ है
साँपों में असा फेंक के अब महव-ए-दुआ हूँ
मालूम है दीमक ने उसे खाया हुआ है
दुनिया के बुझाने से बुझी है न बुझेगी
इस आग को तक़दीर ने दहकाया हुआ है
क्या धूप है जो अब्र के सीने से लगी है
सहरा भी उसे देख के शरमाया हुआ है
इसरार न कर मेरे ख़राबे से चला जा
मुझ पर किसी आसेब का दिल आया हुआ है
तू ख़्वाब-ए-दिगर है तिरी तदफ़ीन कहाँ हो
दिल में तो किसी और को दफ़नाया हुआ है
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गिर जाए जो दीवार तो मातम नहीं करते
करते हैं बहुत लोग मगर हम नहीं करते
करते हैं बहुत लोग मगर हम नहीं करते
है अपनी तबीअत में जो ख़ामी तो यही है
हम इश्क़ तो करते हैं मगर कम नहीं करते
नफ़रत से तो बेहतर है कि रस्ते ही जुदा हों
बेकार गुज़रगाहों को बाहम नहीं करते
हर साँस में दोज़ख़ की तपिश सी है मगर हम
सूरज की तरह आग को मद्धम नहीं करते
क्या इल्म कि रोते हों तो मर जाते हों 'फ़ैसल'
वो लोग जो आँखों को कभी नम नहीं करते
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तेरी आँखें न रहीं आईना-ख़ाना मिरे दोस्त
कितनी तेज़ी से बदलता है ज़माना मिरे दोस्त
कितनी तेज़ी से बदलता है ज़माना मिरे दोस्त
जाने किस काम में मसरूफ़ रहा बरसों तक
याद आया ही नहीं तुझ को भुलाना मिरे दोस्त
पूछना मत कि ये क्या हाल बना रक्खा है
आईना बन के मिरा दिल न दुखाना मिरे दोस्त
इस मुलाक़ात में जो ग़ैर-ज़रूरी हो जाए
याद रहता है किसे हाथ मिलाना मिरे दोस्त
देखना मुझ को मगर मेरी पज़ीराई को
अपनी आँखों में सितारे न सजाना मिरे दोस्त
अब वो तितली है न वो उम्र तआ'क़ुब वाली
मैं न कहता था बहुत दूर न जाना मरे दोस्त
हिज्र तक़दीर में लिक्खा था कि मजबूरी थी
छोड़ इस बात से क्या मिलना मिलाना मिरे दोस्त
तू ने एहसान किया अपना बना कर मुझ को
वर्ना मैं क्या था हक़ीक़त न फ़साना मिरे दोस्त
इस कहानी में किसे कौन कहाँ छोड़ गया
याद आ जाए तो मुझ को भी बताना मिरे दोस्त
छोड़ आया हूँ हवाओं की निगहबानी में
वो समुंदर वो जज़ीरा वो ख़ज़ाना मिरे दोस्त
ऐसे रस्तों पे जो आपस में कहीं मिलते हों
क्यूँ न उस मोड़ से हो जाएँ रवाना मिरे दोस्त
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मुझ को ये फ़िक्र कब है कि साया कहाँ गया
सूरज को रो रहा हूँ ख़ुदाया कहाँ गया
सूरज को रो रहा हूँ ख़ुदाया कहाँ गया
फिर आइने में ख़ून दिखाई दिया मुझे
आँखों में आ गया तो छुपाया कहाँ गया
आवाज़ दे रहा था कोई मुझ को ख़्वाब में
लेकिन ख़बर नहीं कि बुलाया कहाँ गया
कितने चराग़ घर में जलाए गए न पूछ
घर आप जल गया है जलाया कहाँ गया
ये भी ख़बर नहीं है कि हमराह कौन है
पूछा कहाँ गया है बताया कहाँ गया
वो भी बदल गया है मुझे छोड़ने के बा'द
मुझ से भी अपने आप में आया कहाँ गया
तुझ को गँवा दिया है मगर अपने आप को
बर्बाद कर दिया है गँवाया कहाँ गया
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तेरी आँखें न रहीं आईना-ख़ाना मिरे दोस्त
कितनी तेज़ी से बदलता है ज़माना मिरे दोस्त
कितनी तेज़ी से बदलता है ज़माना मिरे दोस्त
जाने किस काम में मसरूफ़ रहा बरसों तक
याद आया ही नहीं तुझ को भुलाना मिरे दोस्त
पूछना मत कि ये क्या हाल बना रक्खा है
आईना बन के मिरा दिल न दुखाना मिरे दोस्त
इस मुलाक़ात में जो ग़ैर-ज़रूरी हो जाए
याद रहता है किसे हाथ मिलाना मिरे दोस्त
देखना मुझ को मगर मेरी पज़ीराई को
अपनी आँखों में सितारे न सजाना मिरे दोस्त
अब वो तितली है न वो उम्र तआ'क़ुब वाली
मैं न कहता था बहुत दूर न जाना मरे दोस्त
हिज्र तक़दीर में लिक्खा था कि मजबूरी थी
छोड़ इस बात से क्या मिलना मिलाना मिरे दोस्त
तू ने एहसान किया अपना बना कर मुझ को
वर्ना मैं क्या था हक़ीक़त न फ़साना मिरे दोस्त
इस कहानी में किसे कौन कहाँ छोड़ गया
याद आ जाए तो मुझ को भी बताना मिरे दोस्त
छोड़ आया हूँ हवाओं की निगहबानी में
वो समुंदर वो जज़ीरा वो ख़ज़ाना मिरे दोस्त
ऐसे रस्तों पे जो आपस में कहीं मिलते हों
क्यूँ न उस मोड़ से हो जाएँ रवाना मिरे दोस्त
इस मुलाक़ात में जो ग़ैर-ज़रूरी हो जाए
याद रहता है किसे हाथ मिलाना मिरे दोस्त
देखना मुझ को मगर मेरी पज़ीराई को
अपनी आँखों में सितारे न सजाना मिरे दोस्त
अब वो तितली है न वो उम्र तआ'क़ुब वाली
मैं न कहता था बहुत दूर न जाना मरे दोस्त
हिज्र तक़दीर में लिक्खा था कि मजबूरी थी
छोड़ इस बात से क्या मिलना मिलाना मिरे दोस्त
तू ने एहसान किया अपना बना कर मुझ को
वर्ना मैं क्या था हक़ीक़त न फ़साना मिरे दोस्त
इस कहानी में किसे कौन कहाँ छोड़ गया
याद आ जाए तो मुझ को भी बताना मिरे दोस्त
छोड़ आया हूँ हवाओं की निगहबानी में
वो समुंदर वो जज़ीरा वो ख़ज़ाना मिरे दोस्त
ऐसे रस्तों पे जो आपस में कहीं मिलते हों
क्यूँ न उस मोड़ से हो जाएँ रवाना मिरे दोस्त
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अब वो तितली है न वो उम्र तआ'क़ुब वाली
मैं न कहता था बहुत दूर न जाना मिरे दोस्त
मैं न कहता था बहुत दूर न जाना मिरे दोस्त
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