10
28 Likes
मैं कहूँ भी तो कैसे कहूँ अब ग़ज़ल
शे'र भी मेरे तन्हा हैं मेरी तरह
शे'र भी मेरे तन्हा हैं मेरी तरह
8
7 Likes
ज़रा सा हाथ लगने से हो जाते ज़ख़्म सारे ठीक
तेरे हाथों में जादू है तू चारासाज़ थोड़ी है
तेरे हाथों में जादू है तू चारासाज़ थोड़ी है
7
24 Likes
मोहब्बत से मोहब्बत मिल गई जैसे
कि सहरा में कली इक खिल गई जैसे
कि सहरा में कली इक खिल गई जैसे
न जाने कैसे तुम बिन जी रहा था मैं
समझ लो हर घड़ी मुश्किल गई जैसे
6
60 Likes
5
37 Likes
4
31 Likes
3
38 Likes
हर गीत में हर बार गाऊँगा तुझे
अपनी ग़ज़ल में गुनगुनाऊँगा तुझे
अपनी ग़ज़ल में गुनगुनाऊँगा तुझे
तू ईद है और तू ही दीवाली मेरी
मैं हर बरस यूँही मनाऊँगा तुझे
2
48 Likes
मोहब्बत से मोहब्बत मिल गई जैसे
कि सहरा में कली इक खिल गई जैसे
कि सहरा में कली इक खिल गई जैसे
न जाने कैसे तुम बिन जी रहा था मैं
समझ लो हर घड़ी मुश्किल गई जैसे
चली थी रेल इक सीटी बजाए बिन
जो मेरे दिल से तेरे दिल गई जैसे
न निकला लफ़्ज़ उस के रू-ब-रू मेरा
मेरे वो होंठ दोनों सिल गई जैसे
ग़ज़ल को मेरी तू ने गुनगुनाया जब
लगा मेरी हाँ में हाँ मिल गई जैसे
उसे इतना क़रीबी क्यो बनाया 'कब्क'
गया इक शख़्स तो महफ़िल गई जैसे
1
18 Likes










