0
  • Search
  • Shayari
  • Writers
  • Events
  • Blog
  • Store
  • Leaderboard
  • Login
0
HomeExplore
Submit
LibraryProfile
रूपम कुमार 'मीत'

Top 10 of रूपम कुमार 'मीत'

रूपम कुमार 'मीत'

Top 10 of रूपम कुमार 'मीत'

    इस जहाँ के लिए आँखों में कशिश है ही नहीं
    मैं किसी और ही मंज़िल का मुसाफ़िर निकला
    रूपम कुमार 'मीत'
    10
    0 Likes
    हुआ है ज़िंदगी जी कर ख़सारा या रसूलुल्लाह
    नहीं बिछड़ेंगे अब तुम से दुबारा या रसूलुल्लाह

    दुआ को हाथ जब उट्ठे हमारा या रसूलुल्लाह
    तो उस दम लब पे हो क़लमा तुम्हारा या रसूलुल्लाह

    तुम्हारा मैं तुम्हारा मैं तुम्हारा या रसूलुल्लाह
    दुलारा हूँ दुलारा हूँ दुलारा या रसूलुल्लाह

    मुयस्सर हो मदीने की ज़ियारत जिस घड़ी हम को
    हमारे साथ हो कुम्बा हमारा या रसूलुल्लाह

    तुम्हारे इश्क़ में किस ने गुज़ारी ज़िन्दगी अपनी
    मेरी जानिब भी कर देना इशारा या रसूलुल्लाह

    तुम्हारा मर्तबा 'रूपम' के मुँह से हो बयाँ कैसे
    तुम्हारी शान में क़ुरआँ है सारा या रसूलुल्लाह
    Read Full
    रूपम कुमार 'मीत'
    9
    0 Likes
    रंज-ओ-ग़म का ये कारवाँ जानाँ
    है हमारे ही दरमियाँ जानाँ

    हम तो मर भी नहीं सके इक साथ
    हो गया इश्क़ राएगाँ जानाँ

    दिल मुहल्ले की सब दिवारों पर
    नज़्म है अपनी दास्ताँ जानाँ

    मेरे सीने पे जो चमकते हैं
    तेरे क़दमों के हैं निशाँ जानाँ

    सारी दुनिया खँगाल बैठे हैं
    अपनी मंज़िल है अब कहाँ जानाँ

    आँधियों से जो खौफ़ आने लगे
    बंद कर लेना खिड़कियाँ जानाँ

    रुख़ ये महताब आँखें नीली हैं
    चाँद देखूँ या आसमाँ जानाँ

    सात जन्मों का साथ हो अपना
    था इसी बात का गुमाँ जानाँ
    Read Full
    रूपम कुमार 'मीत'
    8
    1 Like
    कैसे महदूद हो दो मिसरों में
    एक मुफ़लिस की ज़िंदगी का दुख
    रूपम कुमार 'मीत'
    7
    1 Like
    दिल टूटने का ग़म भी न महसूस कर सके
    बेहिस बना दिया है ज़माने ने यूँ हमें
    रूपम कुमार 'मीत'
    6
    1 Like
    तैर पाता नहीं था जो लड़का
    उस को फेंका गया है पानी में
    रूपम कुमार 'मीत'
    5
    4 Likes
    आज तुलसी में पानी दे कर वो
    चल पड़ा पेड़ काटने के लिए
    रूपम कुमार 'मीत'
    4
    3 Likes
    तीसरे दिन हमें मिली ये ख़बर
    ज़िंदगी चार दिन की होती है
    रूपम कुमार 'मीत'
    3
    7 Likes
    मुफ़लिस की बद-दुआ हूँ मुझे मार दीजिए
    मैं आप इक बला हूँ मुझे मार दीजिए

    उस से बिछड़ के उस की मुहब्बत की आग में
    मुद्दत से जल रहा हूँ मुझे मार दीजिए

    हासिल मुझे करेंगे तो तड़पेंगे उम्र भर
    मैं दर्द-ए-ला-दवा हूँ मुझे मार दीजिए

    क्या कुछ न कर चुका हूँ मैं जीने के वास्ते
    पर अब मैं थक चुका हूँ मुझे मार दीजिए

    ख़ुद अपनी जान लूँगा तो दोज़ख में जाऊँगा
    मैं ख़ुल्द चाहता हूँ मुझे मार दीजिए

    परवाज़ कर न पाएँगे सोहबत में मेरी आप
    मैं ऐब देखता हूँ मुझे मार दीजिए

    हर पैदा होने वाले को लाज़िम है इंतिक़ाल
    इस हक़ से बोलता हूँ मुझे मार दीजिए
    Read Full
    रूपम कुमार 'मीत'
    2
    2 Likes
    अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ
    और किसी को मत देना धोखा जानाँ

    जब आँखों को दरिया करने का मन हो
    तब मेरी रूदाद-ए-ग़म सुनना जानाँ

    दिन से रात तलक मैं तुम को रोता हूँ
    तुम भी मुझ को आठ-पहर रोना जानाँ

    अपने हाथ के कंगन जा पर रखना तुम
    वाँ पर मेरी ग़ज़लें मत रखना जानाँ

    तुम रिश्तों में मत ढूँडो ख़ुशियाँ सारी
    सीखो ख़ुदस मिल कर ख़ुश होना जानाँ

    आज जला दी वो वाली फ़ोटो जिस
    में
    सूट तुम्हारे जिस्म पे था काला जानाँ

    तुम से पहले मैं ख़ुश रहता था लेकिन
    बा'द तुम्हारे रंज-ओ-ग़म रहता जानाँ

    चार महीने खेल के दिल को तोड़ दिया
    मेरा दिल क्या एक खिलौना था जानाँ?

    हाए! तुम्हारे लब को देख के लगता है
    तुम ने 'मीत' का ख़ून पिया होगा जानाँ
    Read Full
    रूपम कुमार 'मीत'
    1
    1 Like
Avinash bhartiAvinash bhartiRAAHIRAAHIYaduvanshi AbhishekYaduvanshi AbhishekAnkit RajAnkit RajZARKHEZZARKHEZBetaab MurtazaBetaab MurtazaAditya NayakAditya Nayak'June' Sahab Barelvi'June' Sahab BarelviKinshu SinhaKinshu SinhaMurli DhakadMurli Dhakad