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Siraj Faisal Khan

Top 10 of Siraj Faisal Khan

Siraj Faisal Khan

Top 10 of Siraj Faisal Khan

    आज मेरी इक ग़ज़ल ने उस के होंटों को छुआ
    आज पहली बार अपनी शाइ'री अच्छी लगी
    Siraj Faisal Khan
    10
    48 Likes
    तुम्हारा हाथ मेरे हाथ से न छूटेगा
    न ख़ानदां से डरूँगा न मैं ज़माने से
    Siraj Faisal Khan
    9
    36 Likes
    तू अपने घर में मुहब्बत की जीत पर ख़ुश है
    अभी ठहर के मेरा ख़ानदान बाक़ी है
    Siraj Faisal Khan
    8
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    मैं इस ख़याल से शर्मिंदगी में डूब गया
    कि मेरे होते हुए वो नदी में डूब गया
    Siraj Faisal Khan
    7
    34 Likes
    अब किसी को नहीं मिरा अफ़्सोस
    जान कर ये बहुत हुआ अफ़्सोस

    दुख नहीं ये जहाँ मुख़ालिफ़ है
    साथ अपने नहीं ख़ुदा अफ़्सोस

    लड़ के बर्बाद हो गए जब हम
    साथ मिल कर किया गया अफ़्सोस

    जब भी ख़ुशियों ने दर पे दस्तक दी
    सामने आ खड़ा हुआ अफ़्सोस

    हम फ़क़त जंग ही नहीं हारे
    हौसला भी बिखर गया अफ़्सोस

    इक ग़ज़ल और हो गई हम से
    शे'र कोई नहीं हुआ अफ़्सोस

    आप को मैं ने ठेस पहुँचाई
    मैं ने बेहद बुरा किया अफ़्सोस

    ख़ूब-सूरत बहुत नज़र आए
    जब मिरा दिल नहीं रहा अफ़्सोस

    मुझ को ख़ुद पर यक़ीं नहीं जानाँ
    तुम ने मुझ पर यक़ीं किया अफ़्सोस

    मैं ने बाक़ी नहीं रखा कुछ भी
    आप ने कुछ नहीं किया अफ़्सोस

    तू है शर्मिंदा इल्म है लेकिन
    तू नज़र से उतर गया अफ़्सोस

    आदमी तू 'सिराज' अच्छा था
    इतनी जल्दी गुज़र गया अफ़्सोस

    फ़ातिहा पढ़ कि फूल रख मुझ पर
    आ गया है तो कुछ जता अफ़्सोस

    उस ने बर्बाद कर दिया मुझ को
    उस को इस का नहीं ज़रा अफ़्सोस

    मुझ को तुम पर बहुत भरोसा था
    तुम ने मायूस कर दिया अफ़्सोस

    ऐ ख़ुदा है हसीं तिरी दुनिया
    पर मिरा जी उचट गया अफ़्सोस
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    Siraj Faisal Khan
    6
    2 Likes
    दिल की दीवार पर सिवा उस के
    रंग दूजा कोई चढ़ा ही नहीं
    Siraj Faisal Khan
    5
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    वो कभी आग़ाज़ कर सकते नहीं
    ख़ौफ़ लगता है जिन्हें अंजाम से
    Siraj Faisal Khan
    4
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    जैसे देखा हो आख़िरी सपना
    रात इतनी उदास थीं आँखें
    Siraj Faisal Khan
    3
    28 Likes
    शायद अगली इक कोशिश तक़दीर बदल दे
    ज़हर तो जब जी चाहे खाया जा सकता है
    Siraj Faisal Khan
    2
    44 Likes
    किताबों से निकल कर तितलियाँ ग़ज़लें सुनाती हैं
    टिफ़िन रखती है मेरी माँ तो बस्ता मुस्कुराता है
    Siraj Faisal Khan
    1
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