
ज़ीस्त है मुझ सेे ख़फ़ा लेकिन गिला कोई नहीं
मसअला ये है कि मेरा मसअला कोई नहीं
कट रही है ज़िंदगी बेकार फ़ुर्सत में यूँ ही
मश्ग़ला ये है कि मेरा मश्ग़ला कोई नहीं
— Zohair Ahmad Sahil
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