aise khulte hain falak par ye sitaare shab ke | ऐसे खुलते हैं फ़लक पर ये सितारे शब के

  - Ashu Mishra

ऐसे खुलते हैं फ़लक पर ये सितारे शब के
जिस तरह फूल हों सारे ये बहार-ए-शब के

तेरी तस्वीर बना कर तिरी ज़ुल्फ़ों के लिए
हम ने काग़ज़ पे कई रंग उतारे शब के

वो मुसव्विर जो बनाता है सहर का चेहरा
उस से कहना कि अभी दर्द उभारे शब के

क्या किसी शख़्स की हिजरत में जली हैं रातें
क्यूँँ शरारों से चमकते हैं सितारे शब के

ये तिरे हिज्र ने तोहफ़े में दिए हैं हम को
ये जो मा'सूम से रिश्ते हैं हमारे शब के

एक मुद्दत से हमें नींद न आई 'आशू'
उम्र इक काट दी हम ने भी सहारे शब के

  - Ashu Mishra

Aaina Shayari

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