raha baaki koi bhi raasta naiiñ | रहा बाक़ी कोई भी रास्ता नईं

  - Avtar Singh Jasser

रहा बाक़ी कोई भी रास्ता नईं
बहुत मजबूर हैं हम बे-वफ़ा नईं

हज़ारों ही सफ़र तय कर चुकी वो
बिछड़ के जिस सेे मैं अब तक चला नईं

तुम्हें मिल जाए कोई मुझ सेे बेहतर
यह उसकी बद्दुआ ही है, दु'आ नईं

किसी का मैं न हो पाया अभी तक
किसी से इश्क़ उस को भी हुआ नईं

चिराग़ ए दिल बुझाया उसने ऐसा
किसी से आज तक रौशन हुआ नईं

हुदूद ए सब्र वो आँसू बताए
जो पलकों के किनारों से गिरा नईं

मुसव्विर ने निगार ए ज़िन्दगी में
कोई भी रंग 'जस्सर' क्यूँ भरा नईं

  - Avtar Singh Jasser

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