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Kitaaben Shayari
बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो
चार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जाएँगे
Nida Fazli
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एक दिन मेरी ख़ामुशी ने मुझे
लफ़्ज़ की ओट से इशारा किया
Anjum Saleemi
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ये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबें
इक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैं
Jaan Nisar Akhtar
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ये शा'इरी ये शाइ'र इस ग़ज़ल को प्रणाम
अदब सीखने वाली हर क़लम को प्रणाम
Aryan Goswami
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अभी भी अपनी किताबों के पिछले पन्ने पर
तुम्हारे नाम को लिखते हैं फिर मिटाते हैं
Haider Khan
16
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आप हैं आग सिफ़त लफ़्ज़ मेरे मोम सिफ़त
मोम से आग का पुतला मैं बनाऊं कैसे
Ramnath Shodharthi
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अश्क़-ओ-ख़ून घुलते हैं तब दीदा-ए-तर बनती है
दास्तान इश्क़ में मरने से अमर बनती है
Jaani Lakhnavi
14
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यूँ ही बस वो मुझ को छोड़ के सब से मिलता रहता है
बच्चा भी तो ग़लत किताबें रख लेता है बस्ते में
Shahnaz Parveen Sahar
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ग़ज़ल हो, शा'इरी हो कहना तो आसाँ नहीं होता
कहे हर लफ़्ज़ का सच से भरा होना ज़रूरी है
Yogamber Agri
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आड़ ले कर नए दौर के इल्म की
फ़ोन ने चिट्ठियों का गला घोंटा है
Intzar Akhtar
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इश्क़ अदब ये और सलीक़ा भी है उस
में
वो आप कहता है जिस को मैं तुम कहती हूँ
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Reshma Shaikh
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सभी किताबें बिखेर डाली तुम ने क्यूँ
कौन किताबों में अब ख़त को रखता है
Saahir
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रूदाद-ए-मुहब्बत गर जो लफ़्ज़ बयाँ कर दें
अहसास तुम्हें हो क्यूँ मैं दफ़्न रिसालों में
Priya omar
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यार तुम ने अचानक नहीं छोड़ा था
इल्म था तुम को सब अब समझ आता है
तय अकेला भी हो सकता था ये सफ़र
तुम नहीं जब यहाँ तब समझ आता है
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Ashish Kumar Tiwari
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पहले ख़यालों को उतारा पन्ने पर
मैं ने मगर फिर उस पे स्याही फेंक दी
Pushkar Tripathi
6
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तुझे कैसे इल्म न हो सका बड़ी दूर तक ये ख़बर गई
तिरे शहर ही की ये शाएरा तिरे इंतिज़ार में मर गई
Mumtaz Naseem
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अब कौन अभी से इक नादान दिवाना हो
जब लफ़्ज़ ज़बाँ का अब भी ज़ख़्म पुराना हो
Anansha
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मैं ने कल शब चाहतों की सब किताबें फाड़ दीं
सिर्फ़ इक काग़ज़ पे लिक्खा लफ़्ज़-ए-माँ रहने दिया
Munawwar Rana
3
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लफ़्ज़ कितने ही तेरे पैरों से लिपटे होंगे
तू ने जब आख़िरी ख़त मेरा जलाया होगा
तू ने जब फूल किताबों से निकाले होंगे
देने वाला भी तुझे याद तो आया होगा
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Khalil Ur Rehman Qamar
2
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टकरा गया वो मुझ से किताबें लिए हुए
फिर मेरा दिल और उस की किताबें बिखर गईं
Unknown
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